मौसम (Weather): किसी स्थान की वायुमंडलीय अवस्था की अल्पकालिक दशा। जल्दी बदलता है — एक दिन/सप्ताह में।
जलवायु (Climate): किसी स्थान की दीर्घकालिक (30+ वर्ष) मौसमी दशाओं का औसत।
जलवायु में बदलाव = 30 वर्ष या अधिक में
🌏 भारत की जलवायु
• भारत = उष्णकटिबंधीय मानसूनी जलवायु
• मानसून शब्द = अरबी "मौसिम" से → पवनों की दिशा का मौसम के अनुसार उलट जाना
• अरब सागर + बंगाल की खाड़ी से हवाओं की दिशा ऋतुवत् परिवर्तन
• भारत = मानसूनी जलवायु वाला देश
2
PART 2 — PREMIUM NOTES
Complete Conceptual Notes | Diagrams | Tables |
🌐 भारतीय जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक
🔑 LANDFORMS — Memory Trick
L — Latitude (अक्षांश) A — Altitude (ऊंचाई) N — Nearness From Sea (समुद्र से निकटता) D — Direction of Wind (पवन की दिशा) F — Forest (वन)
O — Ocean Currents (समुद्री जलधाराएं) R — Rainfall (वर्षा) M — Mountain (पहाड़/पर्वत) S — Soil (मिट्टी)
कारक
प्रभाव
उदाहरण
अक्षांश (Latitude)
कर्क रेखा भारत के मध्य से → उत्तर उपोष्ण, दक्षिण उष्ण | तापमान उच्च
राजस्थान में उच्च तापमान
समुद्र से दूरी
तीन ओर समुद्र → तटीय क्षेत्र समुद्री जलवायु | उत्तर-पश्चिम = महाद्वीपीय
मुंबई vs दिल्ली
उत्तरी पर्वतीय श्रेणियाँ
मानसून रोकती हैं, शीत लहर रोकती हैं, वर्षा का कारण
हिमालय की भूमिका
भू-आकृति
अरावली पश्चिमी भाग वर्षा से वंचित रखती है | पश्चिमी घाट वर्षा
राजस्थान शुष्क, केरल आर्द्र
मानसूनी हवाएं
आर्द्रता, दिशा, गति से वर्षा निर्धारण
SW Monsoon June-Sept
ऊर्ध्व वायु संचरण
जेट स्ट्रीम — मानसून नियंत्रण
पश्चिमी जेट शीत ऋतु
उष्ण कटिबंधीय चक्रवात
बंगाल की खाड़ी + अरब सागर में उत्पन्न
तमिलनाडु, आंध्र में वर्षा
⚠️ परीक्षा ट्रैप: अरावली पर्वत पश्चिम से पूर्व दिशा में है — इसलिए यह अरब सागर की मानसूनी शाखा को नहीं रोकती, जिससे राजस्थान में कम वर्षा होती है। पश्चिमी घाट उत्तर-दक्षिण दिशा में है — इसलिए मानसून को रोकती है।
🌍 कोपेन का जलवायु वर्गीकरण
प्रस्तुति वर्ष
1918
3 जलवायु क्षेत्र
संशोधन
1931 व 1936
विस्तृत वर्गीकरण
Variables
3
तापमान, वर्षा, वनस्पति
📊 Sub-type संकेत (छोटे अक्षर)
f = पर्याप्त वर्षण | m = शुष्क मानसून होते हुए भी वर्षा वन | w = शुष्क शीत ऋतु | h = शुष्क और गर्म | c = चार महीनों से कम में औसत तापमान 10°C से अधिक | g = गंगा का मैदान | S = अर्ध-मरुस्थल | W = मरुस्थल
#
जलवायु प्रकार
संकेत
क्षेत्र
विशेषता
1
लघु शुष्क ऋतु सहित मानसूनी
Amw
गोवा के दक्षिण + पश्चिमी तट, मालाबार व कोंकण तट, अंडमान-निकोबार
250-300 cm वर्षा | गर्मी में 1 शुष्क माह
2
उष्ण कटिबंधीय सवाना
Aw
कर्क रेखा के दक्षिण का अधिकांश प्रायद्वीपीय पठार
75 cm वर्षा | शीत काल शुष्क
3
शुष्क ग्रीष्म + आर्द्र शीत मानसूनी
As
तटीय तमिलनाडु + आंध्र के कुछ भाग
75-100 cm | Retreating Monsoon से वर्षा
4
अर्द्ध-शुष्क स्टेपी
BShw
मध्यवर्ती राजस्थान, पश्चिमी पंजाब, हरियाणा, गुजरात सीमावर्ती, पश्चिमी घाट वृष्टि-छाया
30-60 cm | Steppe वनस्पति
5
उष्ण मरुस्थलीय
BWhw
राजस्थान का सबसे पश्चिमी भाग, उत्तरी गुजरात, हरियाणा का दक्षिणी भाग
30 cm से कम | रेगिस्तानी वनस्पति
6
शुष्क शीत ऋतु की मानसूनी
Cwg
गंगा का मैदान, पूर्वी राजस्थान, उत्तरी मध्य प्रदेश, उत्तर-पूर्वी भारत अधिकतर
गर्मी 40°C तक | शीत 27°C | ग्रीष्म में वर्षा
7
लघु ग्रीष्मकाल + शीत आर्द्र
Dfc
अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, असम हिमालयी भाग
शीत काल ठंडा | आर्द्र अधिकांश वर्ष
8
टुंड्रा तुल्य
ET
उत्तराखंड, लद्दाख, J&K, हिमाचल — 3,000-5,000m
वर्ष भर 10°C से कम | हिमपात
9
ध्रुवीय तुल्य
E
हिमालय — 5,000m से अधिक ऊंचाई
वर्ष भर 0°C से कम
🗺️ भारत — कोपेन के अनुसार जलवायु वर्गीकरण
🔴 Koppen से परीक्षा में पूछे गए तथ्य: (1) कोपेन ने 1918 में जलवायु वर्गीकरण प्रस्तुत किया (2) Cwg और Aw का विभाजन लगभग कर्क रेखा के समान है — यह Dr. काजी अहमद, Dr. स्टाम्प, नारमण्ड द्वारा बताया गया (3) राजस्थान में BWhw और BShw दोनों पाए जाते हैं (4) तमिलनाडु में As जलवायु — Retreating Monsoon से वर्षा
🌧️ मानसून — उत्पत्ति के सिद्धांत
🎯 4 प्रमुख सिद्धांत — याद करें
1. तापीय सिद्धांत (Thermal Theory) — प्राचीन | ताप प्रवणता
2. विषुवतीय पछुआ पवन सिद्धांत — फ्लोन द्वारा प्रतिपादन
3. जेट स्ट्रीम सिद्धांत (YES) — येस (YES) द्वारा
4. अलनीनो सिद्धांत — ENSO
🌡️ 1. मानसून का तापीय सिद्धांत
• ग्रीष्म ऋतु में सूर्य किरणें उत्तरी गोलार्द्ध पर लम्बवत् पड़ती हैं
• भारतीय उपमहाद्वीप पर वृहत निम्न दाब का निर्माण
• इससे उत्तर-पूर्वी व्यापारिक पवनें अनुपस्थित हो जाती हैं (5°S से 30°N)
• तापीय विषुवत रेखा उत्तर की ओर खिसकती है
• उत्तर-पूर्वी व्यापारिक पवनें विषुवत रेखा को पार कर उत्तरी गोलार्द्ध में आ जाती हैं
• फेरेल के नियमानुसार — दाहिनी ओर (Right Hand Side) मुड़ जाती हैं
• भारतीय उपमहाद्वीप पर दक्षिण-पश्चिम मानसून का रूप लेती हैं
🌊 2. विषुवतीय पछुआ पवन सिद्धांत
• फ्लोन नामक वैज्ञानिक ने इस संकल्पना का प्रतिपादन किया
• मानसूनी हवाओं की उत्पत्ति वायुदाब की पेटियों के खिसकाव के कारण
• अंत: उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र (ITCZ) — एक निम्न दाब पेटी
• ITCZ एक doldrums क्षेत्र है जो विषुवत रेखा के ऊपर स्थित है
• Swinging ITCZ — उत्तर-पूर्व एवं दक्षिण-पूर्व व्यापारिक पवनें मिलती हैं
• ग्रीष्म काल में ITCZ उत्तर की ओर खिसककर विषुवतीय पछुआ पवनें दक्षिण-पश्चिम मानसून को जन्म देती हैं
💨 3. जेट स्ट्रीम सिद्धांत (YES Theory)
• येस (YES) द्वारा प्रतिपादन
• जेट स्ट्रीम = ऊपरी वायुमंडल (9-18 किमी.) में अति तीव्रगामी वायु प्रवाह
• औसत गति: 340 किमी/घंटा (अधिकतम 9000 किमी/घंटा तक)
• दक्षिण-पश्चिम मानसून का संबंध उष्ण पूर्वी जेट स्ट्रीम से
• उत्तर-पूर्वी मानसून (शीतकाल) का संबंध उपोष्ण पश्चिमी जेट से
🔵 शीत ऋतु — पश्चिमी जेट स्ट्रीम:
• 20°-35°N के बीच (दोनों अर्धगोलों) में चलती है
• तिब्बत के पठार इसे दो भागों में बाँटता है
• एक शाखा तिब्बत के उत्तर में, दूसरी हिमालय के दक्षिण में
• दक्षिणी शाखा का दाब स्तर फरवरी में 25°N पर ~200-300 मिलीबार
• इसी जेट से पश्चिमी विक्षोभ आते हैं
🔴 ग्रीष्म ऋतु — पूर्वी जेट स्ट्रीम:
• गर्मी में पश्चिमी जेट भारत पर नहीं बहती
• तिब्बत पठार का तापन → उत्तर की ओर खिसकाव
• उष्ण पूर्वी जेट स्ट्रीम की उत्पत्ति — भारत + अफ्रीका के ऊपर
• 15°N तक सीमित | गति 90 किमी/घंटा
• दक्षिण-पश्चिम मानसून इसी से निर्धारित
💨 जेट स्ट्रीम के 4 प्रकार
#
जेट स्ट्रीम
स्थिति
विशेषता
1
ध्रुवीय वाताग्र जेट स्ट्रीम
40°-60° अक्षांश
ध्रुवीय ठंडी + उष्ण कटिबंधीय गर्म हवाओं के संमिलन से | ताप प्रवणता से | पश्चिम से पूर्व | अनियमित
2
उपोष्ण कटिबंधीय पछुआ जेट स्ट्रीम
30°-35° अक्षांश के ऊपर
उपोष्ण उच्च दाब पेटी के उत्तर | ऊपरी क्षोभमंडल में | पश्चिम से पूर्व | नियमित
3
उष्ण कटिबंधीय पूर्वी जेट स्ट्रीम
ग्रीष्मकाल | भारत+अफ्रीका
तिब्बत के पठार के ऊष्मन से उत्पन्न | भारतीय मानसून का मुख्य कारण | 15°N तक
4
ध्रुवीय राशि जेट स्ट्रीम
समताप मंडल
सागर जल से 30 किमी. ऊंचाई पर | Steep Thermal Gradient | शीत काल में तीव्र | ग्रीष्म में धीमा
🌧️ दक्षिण-पश्चिम मानसून (SW Monsoon)
भारत में मानसून जून से सितंबर तक रहता है। उत्तर-पश्चिम भारत और पाकिस्तान में निम्न वायुदाब का क्षेत्र बनता है। ITCZ उत्तर की ओर खिसककर शिवालिक पर्वत के पार चला जाता है। इससे लम्बाकार निम्न दाब की मेखला (मानसून गर्त — Trough) बनती है।
25 मई — अंडमान-निकोबार
→
1 जून — केरल
→
5 जून — चेन्नई
→
10-15 जून — कोलकाता-मुंबई
→
15 जून — पटना-नागपुर
→
15 जून+ — दिल्ली-जयपुर-लखनऊ
🗺️ दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन की सामान्य तिथियाँ
🌊 अरब सागर की मानसूनी पवनें — 3 शाखाएं
शाखा
मार्ग
वर्षा
प्रथम शाखा
पश्चिमी घाट से टकराती → 900-1200m तक चढ़ती
250-400 cm (पवनाभिमुखी ढाल) | वृष्टि-छाया क्षेत्र = नाममात्र
द्वितीय शाखा
मुंबई के उत्तर → नर्मदा + तापी घाटियों से मध्य भारत
छोटानागपुर पठार में 15 cm | गंगा मैदान में प्रवेश → Bay of Bengal शाखा से मिलती है
तृतीय शाखा
सौराष्ट्र प्रायद्वीप + कच्छ → अरावली के साथ पश्चिमी राजस्थान
बहुत कम वर्षा | मुख्य वर्षा Rajasthan नहीं करती
🌊 बंगाल की खाड़ी मानसूनी पवनें
• म्यांमार के तट एवं दक्षिण-पूर्वी बांग्लादेश से टकराती है
• अराकान पहाड़ियाँ इस शाखा के एक बड़े हिस्से को भारतीय उपमहाद्वीप की ओर विक्षेपित करती हैं
• एक शाखा — गंगा के मैदान के साथ पश्चिम की ओर → पंजाब मैदान तक
• दूसरी शाखा — ब्रह्मपुत्र घाटी में → उत्तर-पूर्व में भारी वर्षा
• उप-शाखा → मेघालय में मासिनराम — विश्व की सर्वाधिक वर्षा
• तमिलनाडु तट शुष्क क्यों? — (1) Bay of Bengal branch के समानांतर (2) वृष्टि-छाया क्षेत्र में
↩️ मानसून का निवर्तन (Retreating Monsoon)
चरण
समय
क्षेत्र
प्रारंभ
सितंबर का प्रारंभ
उत्तर-पश्चिम भारत
मध्य
मध्य अक्टूबर
दक्षिणी भारत में निवर्तन
पूर्ण
दिसंबर मध्य
सम्पूर्ण भारत
⚠️ अक्टूबर ऊष्मा (October Heat):
• मानसून निवर्तन के समय उच्च तापमान एवं आर्द्रता
• क्वार की ऊमस या कार्तिक मास की ऊमस भी कहते हैं
• संस्थागत ऊष्मा (Latent Heat) = विकिरण के रूप में Release होती है
• तमिलनाडु को उत्तर-पूर्व मानसून (Retreating) से वर्षा — October-November
• तमिलनाडु को कुल वार्षिक वर्षा का 50-60% Retreating Monsoon से
💥 मानसून विच्छेद (Monsoon Break)
• दक्षिण-पश्चिम मानसून में 1-2 सप्ताह तक वर्षा न हो → मानसून विच्छेद
• मानसून गर्त का उत्तर या दक्षिण की ओर खिसकना इसका कारण
• जब गर्त मैदान के ऊपर → वर्षा अच्छी | जब हिमालय के समीप → विच्छेद
क्षेत्रवार कारण:
1. उत्तर मैदान → उष्ण कटिबंधीय चक्रवातों की कमी
2. पश्चिमी तट → आर्द्र पवनें तट के समानांतर
3. राजस्थान में विच्छेद → वायुमंडल के निम्न स्तरों पर तापमान व्युत्क्रम (Temperature Inversion)
🌀 पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance)
• भूमध्य सागर में यूरोप की ठंडी वायुराशि + सहारा मरुस्थल की गर्म वायु के अभिसरण से समशीतोष्ण चक्रवात
• यह भूमध्य सागर, अन्ध महासागर, कैस्पियन सागर से नमी प्राप्त करता है
• उपोष्ण कटिबंधीय जेट पवनें इस चक्रवात को भारत की ओर प्रेरित करती हैं
• अफगानिस्तान, पाकिस्तान, उत्तर भारत, नेपाल में शीत ऋतु में वर्षा
• भारत में 15 जनवरी से 15 अप्रैल के मध्य प्रभावी
• राजस्थान में = मावट (Mawat) — रबी की फसल के लिए अत्यंत आवश्यक
🌊 एल-निनो / ला-निना / ENSO — Latest 2024-25 Data
⚡ परीक्षा अलर्ट: El Nino/La Nina से हर RAS Paper में 2-3 MCQ। 2024-25 में Super El Nino → भारत में कम वर्षा का प्रभाव। Barnwal + Latest data दोनों पढ़ें।
🔴 अल-निनो (El Niño) — "ईसा का शिशु"
आवर्तन काल
3-8 वर्ष
उत्पत्ति
पेरू तट
दिसंबर 25 के आसपास
प्रभाव
भारत में कम वर्षा
प्रक्रिया:
• पश्चिमी प्रशांत महासागर में सामान्यतः उच्च दाब और निम्न दाब का सामान्य पैटर्न बदल जाता है
• हम्बोल्ट/पेरू की जलधारा (ठंडी) — सामान्यतः पेरू तट पर प्रवाहित होती है
• El Nino में यह ठंडी जलधारा कमज़ोर पड़ जाती है और गर्म जल पश्चिम से आ जाता है
• Upwelling (ऊपर उठना) बंद हो जाता है → मछलियाँ कम → पेरू की अर्थव्यवस्था प्रभावित
• दक्षिण विषुवतीय गर्म जलधारा पूर्व से पश्चिम की बजाय पश्चिम से पूर्व प्रवाहित होती है
• इससे मध्य प्रशांत महासागर में निम्न दाब — हिंद महासागर पूर्वी भाग में उच्च दाब
• भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून का मार्ग बाधित → कम वर्षा → सूखा
🔵 ला-निना (La Niña) — अल-निनो का विपरीत
प्रकार
Counter Current
प्रतिसागरीय धारा
प्रभाव
भारत में अधिक वर्षा
आविर्भाव
El Nino समाप्त होने पर
प्रक्रिया:
• La Nina एक अति ठंडी धारा जो ध्रुवीय दिशा से विषुवत रेखा की ओर पेरू तट पर उत्पन्न होती है
• प्रशांत महासागर में Upwelling और भी तीव्र हो जाती है
• भारत में सामान्य से अधिक वर्षा होती है — La Nina = अच्छा मानसून
⚡ ENSO के परिणाम:
1. भूमध्यरेखीय वायुमंडलीय परिसंचरण में विकृति
2. समुद्री जल वाष्पन में अनियमितता
3. प्लवक की मात्रा में कमी → मछलियाँ कम → पेरू की अर्थव्यवस्था
📊 नवीनतम ENSO डेटा 2024-25 (Latest Data)
वर्ष
ENSO स्थिति
भारतीय मानसून
प्रभाव
2023
El Nino (Strong)
कम वर्षा (89% of LPA)
कई राज्यों में सूखा
2024
El Nino → Neutral transition (June 2024)
सामान्य (106% of LPA)
Good Monsoon recovery
2024-25 (शीत)
La Nina conditions (mild)
अनुकूल संकेत
2025 Monsoon अच्छा expected
2025
La Nina (weak-moderate)
Normal to Above Normal
अच्छी खरीफ संभावना
IMD (India Meteorological Department) Latest:
• Long Period Average (LPA) = 87 सेमी (1971-2020 period)
• 2024 मानसून = 106% of LPA — अत्यंत अच्छा
• Super El Nino (2023) के बाद भारत में रिकवरी
• IMD की ENSO-based मानसून prediction अब standard
🗺️ El Nino vs La Nina — Pacific Ocean Mechanism
🔥 Super El Nino (2015 & 2023) — Special Note:
• 1982-83, 1997-98, 2015-16, 2023 में Super/Strong El Nino आया
• 2015-16 = 2nd strongest ever → भारत में बड़ा सूखा
• 2023 = Strong El Nino → 1998 के बाद से सबसे गर्म वर्ष globally
• दक्षिणी दोलन (Southern Oscillation) = El Nino + वायुदाब पैटर्न = ENSO
• ENSO = El Nino Southern Oscillation
मौसम-वैज्ञानिक 4 ऋतुएं:
1. शीत ऋतु: 15 दिसंबर - 15 मार्च
2. ग्रीष्म ऋतु: 16 मार्च - 15 जून
3. मानसून आगमन: 16 जून - 15 सितंबर
4. मानसून वापसी/शरद: 16 सितंबर - 14 दिसंबर
ऋतु
माह
तापमान
पवन
विशेषताएं
शीत ऋतु
दिस-मार्च
उत्तर भारत: औसत 21°C | पंजाब-राजस्थान: हिमांक से नीचे
उत्तर-पश्चिम → दक्षिण-पूर्व | महाद्वीपीय शुष्क
पश्चिमी विक्षोभ, मावट, कड़ाके की ठंड
ग्रीष्म ऋतु
मार्च-जून
दक्कन: 38°C (मार्च) | NW: 48°C | राजस्थान: 50°C+
NW से SW | लू (Hot wave)
लू, आंधी, आम्रवर्षा, काल वैशाखी
वर्षा ऋतु
जून-सितंबर
Moderate | Humid
दक्षिण-पश्चिम
SW Monsoon, 75% annual rainfall
शरद ऋतु
अक्टूबर-नवंबर
Transitional | October Heat
उत्तर-पूर्व | NE Monsoon
अक्टूबर ऊष्मा, TN में वर्षा, चक्रवात
⛈️ ग्रीष्म ऋतु की प्रसिद्ध स्थानीय तूफान
तूफान
क्षेत्र
विशेषता
आम्र वर्षा (Mango Shower)
कर्नाटक, केरल
Pre-monsoon shower | आम की फसल अच्छी
फूलों वाली बौछार
केरल + निकटवर्ती कहवा क्षेत्र
कहवा के फूल खिलते हैं
काल वैशाखी (Nor'westers)
असम + पश्चिम बंगाल
वैशाख में शाम को विनाशकारी | चाय, पटसन, चावल के लिए लाभदायक
लू (Loo)
पंजाब से बिहार
शुष्क, गर्म, पीड़ादायक | Delhi-Patna के बीच तीव्र
धूल भरी आंधी
पंजाब, हरियाणा, पूर्वी राजस्थान, UP
मई में शाम के समय | अस्थायी राहत
🗺️ वर्षा का वितरण (Rainfall Distribution)
औसत वार्षिक वर्षा
125 सेमी
सर्वाधिक वर्षा
मासिनराम
11,873 mm | मेघालय
न्यूनतम वर्षा
जैसलमेर
~9 सेमी
LPA (1971-2020)
87 सेमी
June-September
क्षेत्र
वर्षा
राज्य/क्षेत्र
अधिक वर्षा (200+ सेमी)
पश्चिमी घाट, NE भारत, उप-हिमालयी क्षेत्र
Meghalaya, Kerala, Sikkim, WB (hills), Andaman
मध्यम वर्षा (100-200 सेमी)
उत्तर भारत मैदान, गुजरात, पूर्वी राजस्थान
UP, Bihar, WB (plains), Goa, Maharashtra (coast)
न्यून वर्षा (50-100 सेमी)
उत्तर-पश्चिम भारत, दक्कन पठार
Punjab, Delhi, Haryana, कर्नाटक (leeward)
अपर्याप्त वर्षा (<50 सेमी)
पश्चिमी राजस्थान, लद्दाख, कच्छ
जैसलमेर, बाड़मेर, Leh, Rann of Kutch
🗺️ भारत — औसत वार्षिक वर्षा वितरण
💡 वर्षा वितरण — Key Facts:
• वर्षा पूर्व से पश्चिम की ओर घटती है: Kolkata 119 cm → Patna 105 cm → Allahabad 76 cm → Delhi 56 cm
• पश्चिमी घाट पवनाभिमुखी ढाल = 250-400 cm | वृष्टि-छाया = नाममात्र
• NE India = सर्वाधिक वर्षा क्षेत्र | W. Rajasthan = न्यूनतम
• तमिलनाडु = मुख्य वर्षा Retreating Monsoon (Oct-Nov) से